राजस्थान 1st न्यूज,बीकानेर। 11 अक्टूबर 2026 से 20 अक्टूबर तक तक नेताजी सुभाष कला मंडल द्वारा हो रही रामलीला की तीसरी रात्रि में वार्ड नंबर 41 पार्षद अश्विनी मिड्ढा तथा पुख सिंह राठौड़ ने मां सरस्वती जी के आगे दीप प्रवज्लित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। रामायण के प्रसंगों को कलाकारों ने अपने अभिनय से जीवंत कर दिया।

आयोजकों के मुताबिक यह ऐतिहासिक रामलीला करीब 36 वर्षो से अधिक पुरानी है। रामलीला की तृतीय रात्रि में ताड़का वध,सीता स्वयंवर का मंचन किया गया जनकपुर में श्रीराम के शिव धनुष तोडऩे और माता सीता के उन्हें वरमाला पहनाने का दृश्य देखकर दर्शक भावुक हो उठे। जहा लक्ष्मण और परशुराम के बीच तीखे संवाद ने दर्शकों को बांधे रखा।

मंचन के दौरान पूरा परिसर जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। जनकपुर में आयोजित स्वयंवर में राजा जनक ने शर्त रखी थी कि जो शिव के पिनाक धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाएगा, उसी से सीता का विवाह होगा। स्वयंवर में पहुंचे कई राजा धनुष को हिला तक नहीं सके। इसके बाद गुरु विश्वामित्र की आज्ञा पाकर श्रीराम आगे बढ़े और सहजता से धनुष उठा लिया। प्रत्यंचा चढ़ाते ही धनुष टूट गया। इसके बाद माता सीता ने श्रीराम के गले में वरमाला डाल दी। इस दृश्य पर दर्शकों ने जय श्रीराम के जयकारे लगाए। आगे श्रीराम और माता सीता के विवाह का मंचन किया गया।
लक्ष्मण-परशुराम संवाद ने बांधा समां
धनुष टूटने की आवाज सुनकर भगवान परशुराम क्रोधित होकर स्वयंवर सभा में पहुंचे। यहां लक्ष्मण और परशुराम के बीच तीखा संवाद हुआ। दोनों के सवाल-जवाब और व्यंग्यपूर्ण बातचीत ने दर्शकों का खूब मनोरंजन किया। अंत में श्रीराम ने विनम्रता से परशुराम का क्रोध शांत कराया। इसके बाद परशुराम उन्हें आशीर्वाद देकर लौट गए।
इस कार्यक्रम मे जगदीश शर्मा, संजीव पाराशर, डी के बोबरवल, राहुल साड़ीवाल, प्रेम नाथ योगी, जितेन्द्र सिंह, हितेश्वर सिंह, ललित खुडिय़ा,मोहसिन खान, लीलाधर तंवर, गोविन्द सोनी,मनीष अरोड़ा, शंकर सिंह, बंटी गेदर, राजेश चौहान, सहित अनेक कार्यकर्ता उपस्थित रहे


