राजस्थान 1st न्यूज,बीकानेर। शहर के कई आवासीय क्षेत्रों में वर्षों से सप्लाई किए जा रहे पेयजल की गुणवत्ता को लेकर गंभीर मामला अब स्थायी लोक अदालत, बीकानेर पहुँच गया है। अधिवक्ता अंकुर शुक्ला ने पहले सरकारी स्तर पर पानी की जाँच करवाई और जाँच रिपोर्ट सामने आने के बाद उसी को आधार बनाकर अदालत का दरवाजा खटखटाया है। सरकारी जाँच रिपोर्ट में संबंधित पानी में नाइट्रेट एवं की मात्रा निर्धारित डिजायरेबल लिमिट से बेहद ज्यादा पाए जाने का मामला सामने आया है। इसके बाद अधिवक्ता अंकुर शुक्ला ने प्रभावित क्षेत्रों में सप्लाई किए जा रहे पेयजल की गुणवत्ता और हजारों परिवारों के स्वास्थ्य से जुड़े सवाल अदालत के समक्ष उठाए हैं।
वर्षों से ऐसा पानी पी रहे निवासी, करीब 20 हजार परिवारों का मामला
मामला किसी एक मकान, गली या मोहल्ले तक सीमित नहीं है। सुदर्शन नगर, वल्लभ गार्डन, पवनपुरी साउथ तथा कुएँ के पानी की सप्लाई वाले अन्य क्षेत्रों के करीब 20 हजार परिवारों के प्रभावित होने का मुद्दा अदालत के समक्ष रखा गया है।
अधिवक्ता अंकुर शुक्ला ने अपनी याचिका में कहा है कि इन क्षेत्रों के निवासी वर्षों से अधिक टीडीएस और नाइट्रेट वाले पानी का उपयोग पेयजल के रूप में करते आ रहे हैं। सरकारी जाँच रिपोर्ट सामने आने के बाद पेयजल की गुणवत्ता को लेकर स्थिति और गंभीर हो गई है।
जब दूसरे क्षेत्रों में नहर का पानी, तो इन इलाकों में कुएँ का पानी क्यों?
अधिवक्ता अंकुर शुक्ला ने सवाल उठाया है कि जब बीकानेर के अन्य क्षेत्रों में पूर्ण रूप से नहर आधारित पानी की सप्लाई की जा रही है, तो सुदर्शन नगर, वल्लभ गार्डन, पवनपुरी साउथ एवं अन्य प्रभावित क्षेत्रों में कुएँ का पानी अथवा नहरी पानी में कुएँ का पानी मिलाकर क्यों सप्लाई किया जा रहा है?
उन्होंने मांग की है कि इन क्षेत्रों में भी अन्य इलाकों की तरह पूर्ण रूप से नहरी पानी की सप्लाई सुनिश्चित की जाए, ताकि हजारों परिवारों को निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप सुरक्षित पेयजल मिल सके।
पीएचईडी के उच्च अधिकारियों को बनाया पक्षकार
मामले में प्रमुख शासन सचिव, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग सहित मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता, अधिशासी अभियंता एवं संबंधित सहायक अभियंता को पक्षकार बनाया गया है। अदालत से प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल की गुणवत्ता निर्धारित मानकों के अनुरूप सुनिश्चित करने, कुएँ के पानी की सप्लाई के स्थान पर नहरी पानी उपलब्ध कराने तथा नागरिकों को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण पेयजल उपलब्ध करवाने की मांग की गई है।
पहले सरकारी जाँच करवाई, रिपोर्ट लेकर सीधे कोर्ट पहुँचे अधिवक्ता अंकुर शुक्ला
इस पूरे मामले की खास बात यह है कि अधिवक्ता अंकुर शुक्ला ने पहले सरकारी स्तर पर पानी की जाँच करवाई, जाँच रिपोर्ट में नाइट्रेट की स्थिति सामने आने के बाद उसी सरकारी रिपोर्ट को आधार बनाकर करीब 20 हजार परिवारों के सुरक्षित पेयजल के अधिकार का मामला स्थायी लोक अदालत तक पहुँचाया।


