करोड़ों के जमीन की खुली परतें तो अधिकारी रह गए हैरान,दर्ज हुआ मुकदमा,पढ़ें खबर-Bikaner News

Bikaner News बीकानेर कलक्टर का एक्शन
राजस्थान 1st न्यूज,बीकानेर। बीकानेर शहर में जमीनों को लेकर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। इसको लेकर अब बीडीए भी अलर्ट हो गया है और हर पहुल की गंभीरता से जंाच में जुटा है। मामला बीडीए से जुड़ा है। जहां पर पर करोड़ों की जमीन के फर्जी पट्टे बनाने का मामला सामने आया है। जिसके बाद अब बीडीए की और से मुकदमा दर्ज करवाया गया है।

हैरान करने वाली जानकारी आई सामने
इस पुरे मामले में हैरान करने वाली जानकारियां सामने आयी है। दरअसल ये जो पट्टे है वो करीब 5 दशक पुराने है। लेकिन जिस रजिस्टर में इनकी एंट्री है वो साल भर पुराना है। ये सारे पट्टे यूआईटी से भी पहले के हैं, जब सिटी इंप्रूवमेंट कमेटी शहर की जिम्मेदारी संभालती थी। तब पट्टों की एंट्री रजिस्टर में होती थी। 1970 के सारे रजिस्टर जर्जर हो चुके हैं, लेकिन जिस रजिस्टर में 40 पट्टे दर्ज किए गए उसके पन्ने और स्याही नई है। यहां तक कि दस्तखत के ऊपर दस्तखत किए गए। पट्टों में जो मिसल यानी दस्तावजों की जो चेन बताई गई वह बीडीए के दस्तावेजों से मैच नहीं हो रही। फर्जीवाड़े वाली इन प्लॉट की कीमत 300 करोड़ रुपए से ज्यादा आंकी जा रही है।

बीडीए की पकड़ में ये मामला अप्रैल में आया था। उसके बाद बीडीए ने कलेक्टर के सामने सारे तथ्य रखे। कलेक्टर ने एक कमेटी बनाई। कमेटी से रजिस्टर, जमीन और पट्टों की सत्यता जांचने के लिए कहा। 30 जून को कमेटी ने रिपोर्ट तैयार कर बीडीए कमिश्नर और कलेक्टर को सौंपी।

कमेटी ने साफ कहा कि 1970 से पहले के रजिस्टर में दर्ज पट्टों वाला रजिस्टर ना तो इतना नया हो सकता है। ना ही लिखावट नई हो सकती है। रजिस्टर पर क्रमांक नंबर भी नहीं। कई जगह सील नहीं है। इन 40 पट्टों की बीडीए के पास तो मिसल यानी चेन तो है, मगर रजिस्टर में दर्ज मिसल से मेल नहीं खाती। ऐसे में ये पट्टे फर्जी हैं। इस रजिस्टर से लेकर पट्टों की फोरेंसिक जांच होनी चाहिए। इसके लिए एफआईआर करानी अनिवार्य है।

 

अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान खुला मामला
दरअसल एक मामूली अतिक्रमण हटाने पहुंची बीडीए की टीम को पुरे मामले की जानकारी सामने आयी। जहां पर बीडीए की टीम अतिक्रमण हटाने पहुंची तो मौके पर काबिज व्यक्ति ने सीईसी यानी सिटी इंप्रूवमेंट कमेटी जो यूआईटी बनने से पहले थी, के नाम का पट्टा दिखाया। बीडीए हैरान हो गया कि इतना पुराना पट्टा। दल ने अधिकारियों को सूचित किया।

 

अधिकारियों ने उस पट्टे की छानबीन की तो फर्जी रजिस्टर में उसका नाम देखा। तब उस रजिस्टर में दर्ज सारे पट्टों को देखा। तब लगा ये तो पूरा रजिस्टर ही फर्जी बनाया गया। करीब 65 से 70 साल पुराना रजिस्टर और उसका पन्ना नया। स्याही भी ताजी। सीईसी के विकास अधिकारी के हस्ताक्षर के ऊपर हस्ताक्षर। लिखावट भी नई। तब मामला कलेक्टर को बताया और उसके बाद कमेटी ने एक-एक कर सारी परतें उखाड़ दी।

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