राजस्थान 1st न्यूज,बीकानेर। मस्ती के लिए जाना और पहचाने जाने वाला शहर बीकानेर इन दिनों फुल मस्ती में है। कारण साफ है सियाळो सीकर भलो उनाळो अजमेर,मारवाड़ नित रो भलो और सावण बीकानेर। जी हां सावण में महादेव की भक्ति में शहर लीन था। जिसके बाद अब तीज-त्यौंहार,जागरण,मेलों का दौर शुरू हो गया। आज बड़ी तीज है तो शहर की महिलाएं अपने पति की लम्बी उम्र के लिए दुआ करती है।

बड़ी तीज पर आज मंदिरों और देवस्थलों पर भी महिलाओं की संख्या रोज की अपेक्षा अधिक दिखी। जहां पर देवी देवताओं को अपने सुहाग के लिए लम्बी उम्र की कामना की। दो दिनों बाद ऊभछळ होगी। इस दिन शाम होने के साथ ही महिलाएं एवं युवतियां सजधज कर मंदिरों की ओर जाती है और रात में चंद्रदर्शन, विधिवत पूजा अर्चना व कथा श्रवण के बाद महिलाओं ने व्रत खोला। इस पर्व में शाम को सूर्यास्त के बाद महिलाएं खड़ी रहती है और चंद्रदर्शन के बाद व्रत खोलती है। शाम को लगातार कई घंटे खड़ा रहना पड़ता है।

 

ऊभछठ के बाद कृष्ण जन्माष्टमी है। जिसको लेकर शहरवासियों ने तैयारियां शुरू कर दी है। बीकानेर में जन्माष्टमी पर लोग अपने-अपने तरीके से घरों में सजावट करते है। जिसको लेकर करीब एक पखवाड़े पहले ही तैयारियां शुरू कर दी जाती है। कृष्ण जन्माष्टमी के शाम के बाद शहर के अंदरूनी क्षेत्रों में मेले सा माहौल बन जाता है और बाइक लेकर निकलना भी मुश्किल हो जाता है। अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग तरीकों से सजावट मिलती है। कई पुतना का बड़ा सा पुतला दिखेगा तो कहीं सामाजिक सरोकार से जुड़ी झांकी। ऐसे में गाडिय़ों पर पलटा काटने वाले लगातार इधर से उधर घूमते हुए आंनद लेते नजर आएंगे।

इन सबके बीच रक्षाबंधन से ही बीकानेर में जागरणों को दौर शुरू हो गया है जो कि रक्षाबंधन से अमावस्या तक चलेगा। हर रोज होने वाले जागरणों में बडी संख्या में लोग पहुंचते है। बीकानेर में होने वालेा जागरणों में मुख्यत नवदीप बीकानेरी,मास्टर नानू,सूर्या पुरोहित,मास्टर भंवर की डिमांड की जाती है। जागरणों के इस दौर में गायक कलाकारों के लिए मिनटों तक का हिसाब भी उनकी आगे की व्यवस्था को गड़बड़ा सकता है। ऐसे में गायक कलाकार मिनट-टू-मिनट कार्यक्रम के हिसाब से चलते है।

वहीं शहर में मेलों को लेकर भी तैयारियां शुरू हो गयी है। रूणिचा नाथ,कोड़मदेसर,शीशा भैरू,पुनरासर जाने वाले भक्तों के लिए सेवादार तैयारियों में जुटे है तो मेलों में जाने वाले जातरू भी अपने काम के साथ-साथ जाने की व्यवस्था में लग गए है। ग्रुप बनाए जा रहे है और तय किया जा रहा है कि इस बार बाबे के भक्तों की टोल किसी ओर जाएगाी। ऐसे में आने वाले 15 दिन भी बीकानेर में आंनद और उत्साह के साथ ही सम्पन्न होंगे।

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