ईरान की धमकी अमेरिकी जहाज को डुबा देंगे, डिफेेंस सिस्टम का तबाह करने का दावा, पढ़ें खबर

अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग का आठवां दिन
राजस्थान 1st न्यूूज, नेटवर्क। अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग का आज आठवां दिन है। लगातार युद्ध भयानक रूप ले रहा है। तीनों ही देश अपने-अपने बड़े दावे कर रहे है। कहीं डिफेंस सिस्टम को निशाना बनाया जा रहा है तो कहीं भयानक तबाही की धमकी दे रही है। ईरान लगातार ईजराइल और अमेरिकी बेस को बड़ा नुकसान होने की बात कर रहा है तो अमेरिका-इजराइल इरान के नौसेना को खत्म करने का दावा कर रहे हैं। ईरान ने बीते एक हफ्ते में सऊदी अरब, यूएई और जॉर्डन में तैनात अमेरिका के टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस सिस्टम को निशाना बनाया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इन हमलों में जॉर्डन के ‘मुवफ्फाक साल्टी एयर बेस पर लगे रडार सिस्टम तबाह हो गया है। इसकी कीमत 22 हजार करोड़ तक होती है।

 

जर्मनी ने कहा है कि वह मिडिल ईस्ट के देशों की मदद के लिए करीब 100 मिलियन यूरो (972 करोड़ रुपए) की अतिरिक्त सहायता देगा।
जर्मनी के विदेश मंत्रालय ने बताया कि यह पैसा उन लोगों की मदद के लिए होगा जिन्हें लड़ाई की वजह से अपना घर छोडऩा पड़ा है।

 

इस समय लेबनान में हालात खराब हो रहे हैं क्योंकि इजराइल के हमले जारी हैं। इसी बीच जर्मनी ने मिडिल ईस्ट से अपने कुछ सैनिक भी वापस बुला लिए हैं।
ईरान के इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने कहा है कि उसने बहरीन में एक अमेरिकी सैन्य बेस पर मिसाइल हमला किया है। इससे पहले आज ईरान के राष्ट्रपति ने कहा था कि अगर पड़ोसी देश अमेरिका की मदद नहीं करेंगे तो वो भी उन पर हमला नहीं करेंगे।

 

ईरान ने कहा है कि अगर अमेरिका के जहाज फारस खाड़ी में आए, तो उन्हें समुद्र में डुबो दिया जाएगा। यह चेतावनी ईरान के एक सैन्य प्रवक्ता ने दी है। यह बयान तब आया जब अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा है कि अमेरिकी नौसेना जल्द ही ऑयल टैंकरों को सुरक्षा लिए जहाज भेज सकती है। ये टैंकर आमतौर पर होर्मुज स्ट्रेट से गुजरते हैं।

 

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि अमेरिका ने पानी की सफाई करने वाले एक प्लांट पर हमला किया है। यह प्लांट केशम आइलैंड पर है। यहां समुद्र के खारे पानी को साफ करके पीने का पानी बनाया जाता है। ईरान के मुताबिक इस हमले के बाद करीब 30 गांवों में पानी की सप्लाई रुक गई है। विदेश मंत्री ने कहा कि किसी देश के ऐसे जरूरी ढांचे पर हमला करना बहुत खतरनाक कदम है और इसके गंभीर नतीजे हो सकते हैं।

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