राजस्थान 1st न्यूज,बीकानेर। आज देशभर में मदर्स डे पर अनेकानेक आयोजन किए जा रहे हैं। सोशल मीडिया भी मदर्स डे की पोस्टों से भरा हुआ है। हर कोई माँ के प्रति अपने प्रेम का दर्शा रहा है। माँ की ममता को लेकर खाजूवाला के जगदंबा पी.जी कॉलेज की प्राचार्य और शिक्षाविद्, विचारक,लेखिका डॉ. गीतांजलि राठौड़ ने अपने शब्दों से मां की ममता को दर्शाने का प्रयास किया है।

मदर्स डे विशेष- डॉ. गीताजंलि राठौड़ की कलम से
माँ यह केवल एक शब्द नहीं, बल्कि भावनाओं, त्याग, प्रेम और समर्पण का प्रतीक है। माँ हमारे जीवन की पहली गुरु, पहली मित्र और सबसे बड़ी प्रेरणा होती है। मदर्स डे हमें यह अवसर देता है कि हम अपनी माँ के प्रति सम्मान, प्रेम और आभार व्यक्त करें।

आज का समय आधुनिकता और तकनीक का दौर है। जीवन तेज़ गति से आगे बढ़ रहा है, लेकिन इस भागदौड़ में रिश्तों के लिए समय निकालना कठिन होता जा रहा है। फिर भी माँ का स्नेह और त्याग कभी कम नहीं होता। चाहे वह गृहिणी हो या नौकरीपेशा महिला, वह हर परिस्थिति में अपने परिवार को प्राथमिकता देती है। आज की माँ केवल घर तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों की शिक्षा, करियर और मानसिक विकास का भी पूरा ध्यान रखती है।

डिजिटल युग और सोशल मीडिया ने जहाँ दुनिया को करीब लाया है, वहीं परिवारों के बीच भावनात्मक दूरी भी बढ़ाई है। ऐसे समय में माँ ही वह मजबूत कड़ी है, जो परिवार को जोड़कर रखती है। वह बच्चों को संस्कार देती है, सही और गलत का अंतर समझाती है तथा हर कठिन परिस्थिति में उनका सहारा बनती है।

आज की माँ अनेक चुनौतियों का सामना कर रही है काम और परिवार के बीच संतुलन, बच्चों को सही दिशा देना और बदलते समाज के साथ तालमेल बैठाना। इसके बावजूद वह अपने कर्तव्यों को मुस्कुराते हुए निभाती है। माँ का त्याग शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता, लेकिन उसका प्रभाव हमारे पूरे जीवन में दिखाई देता है।

मदर्स डे केवल एक दिन नहीं, बल्कि माँ के प्रति सम्मान और प्रेम व्यक्त करने का माध्यम है। हमें यह समझना चाहिए कि माँ को सिर्फ एक दिन नहीं, बल्कि हर दिन सम्मान और स्नेह मिलना चाहिए। उनके साथ समय बिताना, उनकी भावनाओं को समझना और उनका आदर करना ही उनके लिए सबसे बड़ा उपहार है।

अंत में, मैं अपनी माँ और संसार की हर माँ को नमन करती हूँ, जो निस्वार्थ भाव से अपने परिवार के लिए समर्पित रहती हैं। माँ का स्थान जीवन में सबसे ऊँचा होता है और उनके बिना जीवन अधूरा है।
“माँ वो है, जो बिना कहे सब समझ जाती है,
जो हर दर्द में भी मुस्कुराना सिखाती है।”

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