Bikaner News राजस्थान 1st न्यूज,बीकानेर। तस्करी के जुड़े एक मामले में होर्टकोर्ट ने पुलिस को फटकार लगाते हुए एसपी को पुलिसकर्मियों की जांच करने को कहा। मामला बीकानेर रेंज के हनुमानगढ़ का है। जहां पर डोडा जब्त किया गया था। पुलिस कार्रवाई के दौरान आरोपी मौका पाकर भाग गया। मौके पर मौजूद कॉन्स्टेबल दौलतराम और हरिराम ने भागने वाले तस्कर की पहचान जितेंद्र सिंह पुत्र मेजरसिंह के रूप में बताई थी।


जिसके खिलाफ कई महीनों तक जांच चलती रही। पुलिस को आरोपी एक सादे कागज पर लिखकर दिया कि इस तस्करी में वह शामिल नहीं था और काका सिंह नाम का आरोपी शामिल था। पुलिस ने सादे कागज पर आरोपी की लिखी बात को सही मानते हुए उसे छोड़ दिया और काका सिंह को पकड़ लिया।
राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर की एकलपीठ ने एनडीपीएस एक्ट के एक मामले में पुलिस की जांच को पक्षपाती और अनुचित करार देते हुए पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए आरोपी को जमानत दे दी है। जस्टिस सुदेश बंसल की कोर्ट ने पाया कि पुलिस ने असली आरोपी को बचाने के लिए महज एक सादे कागज पर लिखे एफिडेविट के आधार पर दूसरे व्यक्ति को फंसा दिया।
हाईकोर्ट की एकलपीठ ने हनुमानगढ़ पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने इस मामले में पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए काका सिंह की जमानत पर रिहा करने के साथ ही हनुमानगढ़ एसपी को निर्देश दिया है कि वे तत्कालीन और वर्तमान जांच अधिकारियों ( की भूमिका की जांच करें और दोषी पाए जाने पर उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई करें।
बीकानेर के खाजूवाला थानांतर्गत 20-केवाईडी निवासी याचिकाकर्ता काका सिंह के वकील ने तर्क दिया कि पुलिस ने मुख्य आरोपी जितेंद्रसिंह को बचाने के लिए खेल रचा। जितेंद्र सिंह ने 2 जनवरी 2024 को पुलिस को एक बिना स्टाम्प वाला शपथ पत्र दिया। इसमें उसने लिखा कि भागने वाला व्यक्ति मैं नहीं, बल्कि काका सिंह था। जबकि, इससे पहले करीब 6 महीने तक पुलिस ने चार्जशीट में जितेंद्रसिंह के खिलाफ कार्रवाई पेंडिंग रखी।
हैरानी की बात यह रही कि पुलिस ने अपने ही विभाग के कॉन्स्टेबल की गवाही को दरकिनार कर इस एफिडेविट को सच्चा मान लिया। जांच अधिकारी ने जितेंद्रसिंह को केस से बाहर कर दिया गया और काका सिंह को आरोपी बनाकर गिरफ्तार कर लिया।



