social media राजस्थान 1st न्यूज,नेटवर्क। डिजीटल होते जमानें में अच्छी चीजों के साथ बुरी और गलत कंटेट भी तेजी से वायरल हो रहे है। जिसके चलते महिलाओं, परिजनों या फिर छोटे बच्चों के साथ सोशल मीडिया का उपयोग खतरे से खाली नहीं रहा है। कब कौनसा अश्लील कंटेट सामने आ जाए इसकी कोई जानकारी नहीं है। ऐसे में इनकी रोकथाम अति आवश्यक हो गयी है। बीते दिनों ही मद्रास हाईकोर्ट ने भी इसको लेकर टिप्पणी की थी। हाईकोर्ट ने कहा था कि 16 वर्ष के कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन होना चाहिए।
वहीं केंद्र सरकार ने मंगलवार को सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को अश्लील कंटेंट को लेकर चेतावनी जारी की। इसमें कहा गया है कि कंपनियां अश्लील, भद्दे, पोर्नोग्राफिक, बच्चों से जुड़े यौन शोषण वाले और गैर-कानूनी कंटेंट पर तुरंत रोक लगाएं। यदि कंपनियां ऐक्शन नहीं लेंगी तो उन पर केस चलेगा।


मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी ने ये एडवाइजरी सोमवार को जारी की थी। न्यूज एजेंसी ने मंगलवार को रिपोर्ट जारी कर बताया कि एडवाइजरी में इंटरनेट प्लेटफॉर्म को आईटी एक्ट के संबंध में अपने कंप्लायंस फ्रेमवर्क की समीक्षा करने के लिए कहा गया है।
अगर सोशल मीडिया कंपनियां कानून और नियमों का पालन नहीं करेंगी, तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। सिर्फ कंपनियां ही नहीं, बल्कि प्लेटफॉर्म और यूजर्स- दोनों पर केस दर्ज किया जा सकता है।
कई प्लेटफॉर्म गलत और अश्लील कंटेंट को पहचानने और हटाने में ढिलाई बरत रहे हैं। इसलिए अब कंपनियों को ऐसे कंटेंट पर नियमित और तेजी से कार्रवाई करनी होगी। सरकार चाहती है कि सोशल मीडिया पर कोई भी व्यक्ति ऐसा कंटेंट डाले या शेयर न करें जो अश्लील या गंदा हो,पोर्नोग्राफिक हो,बच्चों के यौन शोषण से जुड़ा हो,बच्चों के लिए नुकसानदायक हो,या किसी भी तरह से कानून के खिलाफ हो।
माना जा रहा है कि इस चेतावनी केे बाद सोशल मीडिया पर ऐसे कंटेट की संख्या कम होगी जो कि समाज के लिए ठीक नहीं है।



