नोखा के महावीर बस्ती में भव्य हिंदू सम्मेलन संपन्न; आध्यात्मिक चेतना और राष्ट्रभक्ति का हुआ शंखनाद-Bikaner News

Bikaner News राजस्थान 1st न्यूज,बीकानेर। नोखा के महावीर बस्ती के पावन सान्निध्य में संगठित हिंदू, समर्थ हिंदू के ध्येय वाक्य के साथ आयोजित हिंदू सम्मेलन वैचारिक क्रांति और सांस्कृतिक गौरव के संगम के रूप में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ लालासर साथरी के पूज्य संत डॉ. स्वामी सच्चिदानंद जी आचार्य, सुप्रसिद्ध कथावाचक महावीर पंचारिया, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रखर वक्ता दिग्विजय सिंह, शिवनारायण झंवर, हीरालाल लखारा एवं शंकरलाल ओझा ने माँ भारती और मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन कर किया।
सम्मेलन को आशीर्वाद प्रदान करते हुए स्वामी सच्चिदानंद आचार्य ने कहा कि सनातन संस्कृति विश्व की वह शाश्वत धरोहर है जिसने सदैव वसुधैव कुटुंबकम का मार्ग प्रशस्त किया है। उन्होंने आह्वान किया कि हिंदू समाज की शक्ति उसके संगठन में निहित है और जब समाज संगठित होता है, तभी राष्ट्र समर्थ बनता है। कथावाचक महावीर जी पंचारिया ने अध्यात्म और धर्म-ज्ञान के माध्यम से उपस्थित जनसमूह में सांस्कृतिक चेतना का संचार किया।

मुख्य वक्ता के रूप में विचार व्यक्त करते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिप्रेक्ष्य में हिंदू समाज को अपनी आध्यात्मिक शक्ति और गौरवशाली इतिहास को पुन: स्मरण करने की आवश्यकता है। उन्होंने संगठन को ही कलियुग की सर्वोच्च शक्ति बताया। समाज के सर्वांगीण उत्थान हेतु दिग्विजय सिंह ने पञ्च परिवर्तन का एक ऐसा दिव्य मार्गदर्शक मंत्र प्रस्तुत किया, जो आधुनिक भारत की चुनौतियों का सांस्कृतिक समाधान है। उन्होंने आह्वान किया कि जब हम जाति-पाति के कृत्रिम भेदों को त्यागकर सामाजिक समरसता के अमृत से अभिसिंचित होंगे, तभी समाज एक अभेद्य शक्ति बनेगा। इस शक्ति का केंद्र हमारा परिवार है, जहाँ कुटुम्ब प्रबोधन के माध्यम से नई पीढ़ी में संस्कारों का बीजारोपण करना अनिवार्य है, ताकि हमारी युवा शक्ति अपनी जड़ों से जुड़ी रहे।

उन्होंने स्वदेशी जीवनशैली को आत्मगौरव का प्रतीक बताते हुए कहा कि अपनी भाषा, वेशभूषा और उत्पादों के प्रति निष्ठा ही हमें स्वावलंबी बनाएगी। साथ ही, पर्यावरण संरक्षण को केवल एक अभियान नहीं, अपितु प्रकृति पूजन के रूप में स्वीकार कर जल, थल और नभ की शुचिता बनाए रखना हमारा आध्यात्मिक दायित्व है। अंतत:, इन सभी परिवर्तनों की सार्थकता तभी है जब हम अधिकारों के व्यामोह से ऊपर उठकर अपने नागरिक कर्तव्यों की वेदी पर राष्ट्र-प्रथम का संकल्प अर्पित करें। इन पाँचों सूत्रों का एकीकरण ही उस समर्थ और संगठित हिंदू समाज की आधारशिला है, जो भारत को पुन: विश्व-गुरु के पद पर प्रतिष्ठित करेगा। कार्यक्रम के प्रारंभ में शिवनारायण झंवर ने सम्मेलन की भूमिका प्रस्तुत करते हुए हिंदू दर्शन और भारतीय परंपराओं की महत्ता पर प्रकाश डाला और आज के आयोजन की प्रासंगिकता को स्पष्ट किया।

 

सम्पूर्ण कार्यक्रम का संचालन राजेश स्वामी ने अपनी विशुद्ध साहित्यिक और ओजस्वी शैली में किया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय और राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत बना रहा। मंचासीन अतिथियों का परिचय एवं आत्मीय अभिनंदन दिनेश भार्गव द्वारा करवाया गया। कार्यक्रम के सफल आयोजन पर जयदेव बिठ्ठू ने उपस्थित समस्त मातृशक्ति, प्रबुद्ध जनों और कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।
सम्मेलन का समापन सामूहिक भारत माता की आरती और प्रसाद वितरण के साथ हुआ। आरती के दौरान संपूर्ण परिसर जयकारों से गुंजायमान हो उठा, जो समाज की अटूट आस्था और अखंड संकल्प का प्रतीक बना। इस अवसर पर बड़ी संख्या में नगरवासी और धर्मप्रेमी उपस्थित रहे।

Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!