Bikaner News राजस्थान 1st न्यूज,बीकानेर। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देशानुसार केंद्र सरकार द्वारा लागू नई मनरेगा नीति के विरोध में मनरेगा बचाओ संग्राम अभियान विधानसभा क्षेत्र लूणकरणसर में तीसरे चरण के दूसरे दिन यात्रा की शुरुआत नाथवाणा गांव की चौपाल से हुई।



यात्रा का नेतृत्व पीसीसी महासचिव व विधानसभा प्रत्याशी डॉ राजेंद्र मूंड ने किया। ब्लॉक कांग्रेस कमेटी लूणकरणसर के तत्वाधान में आयोजित यह जनसंवाद यात्रा नाथवाणा से प्रारंभ होकर किसनासर, राजपुरा हुड्डान, मनाफरसर, धीरदान, करनीसर, छट्टासर, कागासर आदि गांवों की चौपाल में पहुंचकर जनसंवाद किया गांव गांव आयोजित चौपालों मे बड़ी संख्या में महिलाएं, नौजवान, मजदूर, ग्रामीण एवं कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
ग्रामीणों को संबोधित करते हुए विधानसभा प्रत्याशी डॉ राजेंद्र मूंड ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार सुनियोजित तरीके से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम को कमजोर करने का काम कर रही है इसलिए मनरेगा से महात्मा गांधी के नाम को हटाने की साजिश न केवल राष्ट्रपति का अपमान है बल्कि ग्रामीणों गरीबों मजदूरों और किसानों के अधिकारों पर सीधा हमला है इसलिए मनरेगा का नाम बदलना भाजपा सरकार का लक्ष्य नहीं है बल्कि वह इस रोजगारपरक योजना को बंद करना चाहती है कांग्रेस किसी भी सूरत में मनरेगा को बंद नहीं होने देगी, उन्होंने लूणकरणसर विधानसभा में पंचायतीराज व शहरी निकायों के परिसीमन में हुई विसंगतियों को भी लोगों के सामने रखा।

ब्लॉक अध्यक्ष अजय गोदारा ने कहा कि मनरेगा योजना को बदलने से मजदूरों का पलायन रोकने और स्थानीय तौर पर रोजगार उपलब्ध कराने की कोशिशें पर पानी फिर गया है इससे मजदूर वर्ग के समक्ष रोजी रोटी का संकट उत्पन्न हो गया है मनरेगा योजना से महिलाएं दलित आदिवासी और वंचित वर्गों को विशेष लाभ मिला इस योजना को पुन बहाल नहीं किया गया तो कांग्रेस बड़ा आंदोलन करेगी।
इस मनरेगा बचाओ संग्राम चौपाल जनसंवाद यात्रा को आईटी सेल प्रदेश सहसंयोजक विक्रम स्वामी, ब्लॉक प्रवक्ता बंशी हुड्डा, जिला सचिव रामप्रताप सियाग, सहित कई वक्ताओं ने संबोधित किया।

इस मनरेगा बचाओ संग्राम चोपाल जनसंवाद यात्रा में पूर्व सरपंच सुरेश गोदारा, जिला अध्यक्ष (शिक्षक प्रकोष्ठ) डालूराम सारण, प्रभु गोदारा, भूराराम नेहरा, पूर्व सरपंच जगदीश नेहरा, मांगीलाल सारण, मानाराम मेघवाल, चेतनराम नायक, राकेश कूकणा, भगवानाराम राव, रामकिशन गोदारा, भागीरथ गाट, पूर्णाराम गोदारा, किशन मेघवाल, रतिराम गोदारा, गोपीराम सारण, राजेंद्र नेहरा, जसवीर गोदारा, मालाराम गिला, सुभाष सीवर, हेतराम गोदारा, महेन्द्र मूंड, तोलाराम सारण, रुपाराम माली, रामनिवास मूंड, लालखा तेली, तोलाराम खाती, दौलतराम मूंड, राकेश सारण, मांगीलाल गोदारा, सेन खा, हीरदास स्वामी, मुखराम सियाग, कुरडाराम सेसवा समेत अनेक कार्यकर्ता मौजूद रहे।


