उठो जागो और स्वदेशी अपनाओ, विवेकानंद जयंती पर हुआ दौड़ का आयोजन-Bikaner News 

Bikaner News  राजस्थान 1st न्यूज,बीकानेर। उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए के कालजयी मंत्र को आत्मसात करते हुए, रायसर मार्ग स्थित आदर्श विद्या मंदिर उच्च माध्यमिक, नोखा के प्रांगण में स्वामी विवेकानंद जयंती एवं राष्ट्रीय युवा दिवस के उपलक्ष्य में स्वदेशी संकल्प दौड़ का आयोजन किया गया। यह आयोजन न केवल एक शारीरिक व्यायाम था, बल्कि राष्ट्रभक्ति और स्वदेशी के प्रति समर्पण का एक जीवंत अनुष्ठान सिद्ध हुआ।


केसरिया ध्वज के साथ हुआ शंखनाद
कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ मुख्य अतिथियों द्वारा भगवी पताका फहराकर किया गया। इस अवसर पर विकास अधिकारी भोम सिंह इंदा, प्रबंध समिति के शिव नारायण झंवर, उपाध्यक्ष मुरली मनोहर मोहता, प्रधानाचार्य आशीष डागा, भागचंद बिश्नोई एवं रघुवीर सिंह ने विवेकानंद जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। अतिथियों ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि भारत का भविष्य आज की युवा शक्ति के संकल्पों पर टिका है।


जब यह संकल्प दौड़ विद्यालय के पीछे के द्वार से प्रस्थान कर तहसील मार्ग, पंचायत समिति से होते हुए स्थानीय पुलिस थाने पहुँची, तो वहां थानाधिकारी अरविन्द भारद्वाज ने विद्यार्थियों को जीवनोपयोगी मार्गदर्शन दिया। उन्होंने वर्तमान डिजिटल युग में बढ़ते साइबर अपराधों से सतर्क रहने की चेतावनी दी तथा यातायात नियमों की महत्ता बताते हुए कहा कि अनुशासन ही जीवन की सुरक्षा का आधार है।
विद्यालय के पूर्व छात्र एवं वर्तमान में जेटीओ जयदयाल मांझू ने इस अवसर पर अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि विद्या भारती के विद्यालयों में प्रदान किया जाने वाला अनुशासन और समय-पालन ही उनके जीवन की सफलता की आधारशिला है। विद्यालय परिवार की ओर से जयदयाल मांझू का स्वामी विवेकानंद का चित्र एवं अंग वस्त्र भेंट कर आत्मीय सम्मान किया गया।

 

बौद्धिक सत्र में आचार्य मुरलीराम शर्मा ने स्वामी विवेकानंद के सिद्धांतों और स्वदेशी की अवधारणा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने रेखांकित किया कि स्वदेशी केवल वस्तुओं का उपयोग नहीं, अपितु अपने राष्ट्र की प्रतिभा और श्रम का सम्मान करना है। उन्होंने कहा कि विवेकानंद जी के लिए ‘नर सेवा ही नारायण सेवा थी। उन्होंने आत्मज्ञान के साथ-साथ राष्ट्र के प्रति कर्तव्यबोध को सर्वोपरि रखा। स्वदेशी का अर्थ उनके लिए केवल वस्तुओं तक सीमित नहीं था, बल्कि अपनी संस्कृति और अस्मिता पर गर्व करना था। कार्यक्रम के अंत में प्रधानाचार्य आशीष डागा ने विचार रखते हुए सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त किया और विद्यार्थियों को निरंतर प्रगति पथ पर अग्रसर रहने का पाथेय प्रदान किया।

Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!