Bikaner News खेलण दो गणगौर, म्हाने खेलन दो गणगौर…


राजस्थान 1st न्यूज,बीकानेर। धुलण्डी के दिन से ही गणगौर की पूजा शुरू हो जाती है जो कि लगातार जारी है। बालिकाएं, युवतियां हर रोज सुबह उठकर देवी माँ गणगौर की विधि विधान से पूजा अर्चन करती है तो शाम को गणगौर की खोल भराई एवं पानी पिलाने की रस्त पूर्ण की जाती है। इसी कड़ी में भाटोलाई तलाई मोहल्ला बीकानेर में शनिवार को गवरजा माता का उत्सव अत्यंत श्रद्धा, आस्था और उल्लास के साथ सामूहिक रूप से मनाया गया।

इस अवसर पर मोहल्ले सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा गवरजा माता के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और मंगलमय जीवन की कामना की।
कार्यक्रम से जुड़ी शशिकला शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि आयोजन के दौरान मोहल्ले की महिलाएं एवं बालिकाएं पारंपरिक वेशभूषा में सुसज्जित होकर गणगौर प्रतिमाएं लेकर भक्ति भाव के साथ आयोजन स्थल पर पहुंचीं। इसके पश्चात गवरजा माता की विधिवत पूजा-अर्चना की गई तथा पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार खोल भराई एवं पानी पिलाने की रस्म कोमल शर्मा द्वारा संपन्न करवाई गई।
पूजन-अर्चन के उपरांत महिलाओं द्वारा पारंपरिक गवर के गीतों का मधुर एवं सामूहिक गायन किया गया। जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय और आनंदमय हो उठा। कार्यक्रम के दौरान गूंजते पारंपरिक गीतों की स्वर लहरियों ने सभी श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया।
खेलन दो गणगौर, म्हाने खेलन दो गणगौर…
आवो आवो इसरजी, भेगा आवो…
मोती समंदरीये में निपजे, म्हारी गणगौर सजी…आदि
इन पारंपरिक गीतों के गायन में मुख्य रूप से पद्मश्री, विनीता, शशिकला, सुमन, सरोज, रामा, वर्षा एवं आराध्या की विशेष भूमिका रही, जिनकी मधुर प्रस्तुति ने पूरे आयोजन को और भी आकर्षक बना दिया। भजन-कीर्तन एवं गवर के गीतों से संपूर्ण वातावरण भक्ति, उल्लास और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो गया। इस अवसर पर अंशु,आशा,आयुषी,अंजू, विदुषी, चित्रा, प्रेशाली, सन्तोष, अवि सहित मोहल्ले की अनेक महिलाएं एवं बालिकाएं उपस्थित रहीं। सभी ने सामूहिक रूप से इस पावन उत्सव को अत्यंत हर्षोल्लास एवं पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न किया।



