सखी सेंटर के सेवाकर्मियों ने निभाया मानवता का धर्म, बिहार की रिंकी को मिलवाया परिजनों से, परिजन बोले- अनजान शहर में सखी सेंटर के लोग बने परिजन, देखें वीडियो-Bikaner News

Bikaner News राजस्थान 1st न्यूज,बीकानेर बीकानेर में सखी सेंटर द्वारा बिहार से निकली मानसिक रूप से परेशान महिला को अपने घरवालों से मिलवाते हुए मानवता का धर्म निभाया। नत्थुसर गेट बाहर बिन्नाणी कॉलेज से पहले ंबने सखी सेंटर में कार्यरत सेवाकर्मियों ने अपना धर्म निभाया और बिहार की विवाहिता को अपने परिवार से मिलवाया।

दरअसल बिहार की रहने वाले विवाहिता रिंकी 6 मार्च को घर में अपने पति से नहाने और घर के काम को लेकर कुछ विवाद हुआ। जिसके बाद मानसिक रूप से बीमारी महिला घर से निकल गयी और ट्रेन में सवार हो गयी।

 

बिहार से रवाना हुई महिला दिल्ली पहुंच गयी। जहां पर किसी महिला ने उसे दिल्ली सराय रोहिल्ला से बीकानेर के लिए रवाना कर दिया। 9 मार्च को विवाहिता बीकानेर पहुंची और घूमते-घूमते नयाशहर थाने के पास पहुंची। जहां पर कुते पीछे पड़ गए। इस दौरान पुलिस टीम ने रिंकी को सखी सेंटर पहुंचाया।

सखी सेंटर की प्रबंधक अधिवक्ता सरिता गोदारा ने बताया कि 9 मार्च को पुलिस टीम रिंका को सखी सेंटर में सुपुर्द करके चले गए। जहां पर रिंकी कुछ भी बताने की स्थिति में नहीं थी। केवल रो रही थी और कोई भी जानकारी नहीं दे पा रही थी। जिसके बाद स्टॉफ ने समझाया तब रिंकी ने बताया कि वह मधुबनी बिहार की रहने वाली है। जिसके बाद सखी सेंटर से जुड़े सरिता गोदारा, रजनी पारीक सहित सभी लोगों ने परिवार को ढूंढने के प्रयास शुरू किए। इंटरनेट के माध्यम से धीरे=धीरे कड़ी से कड़ी जोड़ते हुए उसके गांव का पता किया और फिर परिजनों की जानकारी मिली।

 

 

सखी सेंटर की केस वर्कर रजनी पारीक ने बताया कि 9 मार्च से लेकर आज 12 मार्च सुबह तक उसके लिए खाना,पीने, रहने के लिए सेेंटर में सुविधाएं दी गई और घर आए मेहमान की तरह उसकी देखभाल की तो रिंकी सहज हुई। जिसके बाद जब घरवाले पहुंचे तो रिंकी की आंखों में आंसु आ गए।

 

रिंकी के परिजन आज 12 मार्च को सखी सेंटर पहुंचे और रिंकी को लेकर गए है। इस दौरान रिंकी के परिजनों ने सखी सेंटर की व्यवस्थाओं की सराहन की और कहा कि सखी सेंटर नहीं होत तो शायद ही उन्हें रिंकी वापस मिल पाती। परिजनों ने सखी सेंटर के सभी सेवाकर्मियों का आभार जताया। बता दें कि बीकानेर में दो सखी सेंटर है जो कि 24 घंटे और 365 दिनों तक खुले रहते हैं। जहां पर हर समय एक लेड़ीज और एक जेंटस की ड्यूटी रहती है।

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