Bikaner News राजस्थान 1st न्यूज,बीकानेर। एक तरफ इस समाज में दहेज को लेकर परिवार के विवाद थानों में पहुंच रहे है। जहां पर लाखों का दहेज कबाड़ बन रहा है। वहीं कुछ ऐसे भी लोग है जो कि दहेज के बजाय पवित्र रिश्तों के बंधन को ही तवज्जों दे रहे हैं। ऐसी ही खबर कोलाय उपंखड़ क्षेत्र से सामने आयी है। जहां चांडासर में अमरचंद जनागल पुत्र लिच्छूराम जनागल ने सामाजिक कुरीतियों को खत्म करने का संकल्प लेते हुए अच्छी पहल की। जनागल परिवार के बहुआयामी सोच के धनी अमरचंद जनागल (बबलू) एवं सुनीता खुराव (सोनू) ने 11 मार्च, 2026 को गीगासर गांव में दहेज मुक्त विवाह रच समाज को संदेश दिया है। यह विवाह चाण्डासर के साथ-साथ आस-पास के गांवों के युवाओं को भी दहेज मुक्त विवाह के लिए प्रेरित करने वाला है।



लिच्छूराम जनागल (पिता) ने समाज के सामने एक मिसाल पेश करते हुए इस विवाह में किसी भी प्रकार का दहेज स्वीकार करने
से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि बेटी ही सबसे बड़ा धन है और उसे सम्मान के साथ घर लाना ही सबसे बड़ी खुशी हैं। उन्होंने बताया कि सामाजिक क्रांति केवल और केवल युवाओं के सहयोग से ही लाई जा सकती हैं साथ ही राजस्थान शिक्षक संघ (अंबेडकर) के प्रदेश महामंत्री दीनदयाल जनागल ने कहा कि दहेज प्रथा एक घृणित सामाजिक बुराई है, जिसे केवल कानून से नहीं, बल्कि सामूहिक सामाजिक सुधारों से ही समाप्त किया जा सकता है।

यह एक वैचारिक क्रांति है। जब तक समाज का हर नागरिक स्वेच्छा से इसे छोडऩे का संकल्प नहीं लेगा, तब तक यह कुप्रथा पूरी तरह समाप्त नहीं होगी। प्रशासन और जागरूक नागरिको को मिलकर ऐसी मिसालों को प्रोत्साहित करना चाहिए। विवाह को यादगार और आदर्श बनाने में भाई पुरखाराम जनागल का विशेष सहयोग रहा। परिवार के सदस्यों ने एकजुट होकर यह संदेश दिया कि रिश्तों की अहमियत पैसों से कही बढ़कर हैं। सादगी के साथ संपन्न हुई इस शादी ने यह साबित कर दिया कि यदि इच्छाशक्ति हो, तो समाज में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।



