
Bikaner News राजस्थान 1st न्यूज,बीकानेर। सरस्वती उपासना के महापर्व वसंत पंचमी पर रायसर मार्ग स्थित श्री दुर्गादत्त भट्टड़ प्राथमिक आदर्श विद्या मंदिर में श्रद्धा और उत्साह का संगम देखने को मिला। इस अवसर पर विद्यारंभ संस्कार का, जहाँ प्राचीन भारतीय परंपराओं के अनुसार नन्हे मुन्नों को अक्षर ज्ञान की दुनिया में प्रवेश कराया गया। पूरा विद्यालय परिसर पीले परिधानों में सजे भैया-बहनों और केसरिया आभा से ओत-प्रोत नजर आया।



कार्यक्रम का शुभारंभ मां शारदे के पूजन और दीप प्रज्वलन से हुआ। प्रधानाचार्य रघुवीर सिंह राठौड़ ने जानकारी देते हुए बताया कि विद्या भारती की शिक्षण पद्धति में संस्कार युक्त शिक्षा को सर्वोपरि रखा गया है। इसी कड़ी में आज नवीन विद्यार्थियों ने अपने जीवन की प्रथम शैक्षणिक दहलीज पर कदम रखा। पवित्र अग्नि के समक्ष बैठकर यजमानों, प्रबन्ध समिति सदस्यों और आचार्यों ने वेदोक्त मंत्रों के साथ ग्रंथों का पूजन किया और यज्ञ में आहुतियां देकर बालकों के बुद्धि, बल और सात्विक ज्ञान की कामना की।

महोत्सव का सबसे आकर्षक और ह्रदयस्पर्शी केंद्र 3 से 5 वर्ष के बालकों का पाटी पूजन रहा। आधुनिक चकाचौंध के बीच जब नन्हे हाथों ने पारंपरिक स्लेट और चौक का पूजन कर अपना पहला अक्षर उकेरा। मंत्रोच्चार के बीच अभिभावकों ने अपने बच्चों के साथ यज्ञ में आहुति देकर यह संकल्प लिया कि वे उन्हें राष्ट्रभक्त और सुसंस्कृत नागरिक बनाएंगे।
प्रबन्ध समिति के संरक्षक शिवनारायण झंवर ने अपने प्रेरणाबोधक उद्बोधन में कहा कि विद्यारंभ संस्कार केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह बालक के मानस पटल पर ज्ञान के प्रति श्रद्धा जागृत करने का आध्यात्मिक मार्ग है। हमारी गौरवशाली संस्कृति में गुरु और ग्रंथ के प्रति समर्पण ही वास्तविक शिक्षा का आधार है, जिससे बालक का सर्वांगीण विकास संभव है।
इस संस्कारोत्सव में प्रबन्ध समिति के अध्यक्ष राजेन्द्र सिंह राठौड़, मुरली मनोहर मोहता, सुरेन्द्र कुमार हीरावत तथा संकुल प्रमुख आशीष डागा आदि उपस्थित रहे। अतिथियों ने नए सत्र में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को तिलक लगाकर और आशीर्वाद प्रदान कर उनके उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना की। कार्यक्रम के अंत में विद्या की अधिष्ठात्री देवी को भोग लगाकर सभी उपस्थितजनों को प्रसाद वितरित किया गया।


