राजस्थान 1st न्यूज,बीकानेर। राजस्थानी साहित्य के पुरोधा मुरलीधर व्यास ‘राजस्थानी’ की 128वीं जयंती पर रविवार को आयोजित कार्यक्रम ने भाषा और साहित्य की समृद्ध परंपरा को एक बार फिर जीवंत कर दिया। मुरलीधर व्यास ‘राजस्थानी’ स्मृति संस्थान के तत्वावधान में आयोजित इस समारोह में साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली से सम्मानित वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. चेतन स्वामी और युवा रचनाकार विप्लव व्यास का शॉल, साफा एवं प्रशस्ति-पत्र भेंट कर सम्मान किया गया।


कार्यक्रम के मुख्य वक्ता वरिष्ठ साहित्यकार मालचंद तिवाड़ी ने अपने उद्बोधन में मुरलीधर व्यास ‘राजस्थानी’ के ऐतिहासिक योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि यदि व्यास नहीं होते, तो राजस्थानी भाषा को साहित्य अकादेमी की मान्यता प्राप्त 24 भाषाओं में स्थान मिल पाना संभव नहीं होता। उन्होंने बताया कि व्यास के चर्चित कहानी संग्रह ‘बरसगांठÓ पर प्रसिद्ध भाषा-विद्वान सुनीत कुमार चटर्जी की सकारात्मक टिप्पणी ने राजस्थानी भाषा की प्रतिष्ठा को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जो आगे चलकर अकादेमी स्तर पर भाषा की स्वीकृति का आधार बनी।

सम्मानित साहित्यकार डॉ. चेतन स्वामी ने मुरलीधर व्यास की कहानियों की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने सबसे पहले यह स्थापित किया कि राजस्थानी में भी सशक्त और प्रभावी कहानियां लिखी जा सकती हैं। उन्होंने समकालीन लेखन पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज के दौर में नई संवेदनाओं और वर्तमान संदर्भों की कहानियों की आवश्यकता है, जबकि अधिकांश रचनाएं अब भी उन्नीसवीं सदी की शैली में अटकी हुई प्रतीत होती हैं। उन्होंने रचनाकारों से नियमित लेखन की आदत विकसित करने और हर माह कम से कम एक नई कहानी लिखने का संकल्प लेने का आग्रह किया।

युवा रचनाकार विप्लव व्यास ने मुरलीधर व्यास के प्रसिद्ध कहानी संग्रह ‘बरसगांठ के हिंदी अनुवाद के अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि व्यास की कहानियों में निष्पक्षता और सामाजिक सरोकार स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं तथा वे समाज की कुरीतियों और विसंगतियों पर निर्भीकता से प्रहार करते हैं, जो आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं।
कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों के स्वागत से हुई। सम्मानित अतिथियों का परिचय युवा रचनाकार शशांक शेखर जोशी ने प्रस्तुत किया। अंत में संस्था अध्यक्ष एवं मुरलीधर व्यास ‘राजस्थानी’ के पौत्र श्रीनाथ व्यास ने सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संस्था भविष्य में भी ऐसे साहित्यिक आयोजनों के माध्यम से राजस्थानी भाषा और साहित्य को नई ऊर्जा देती रहेगी। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार हरीश बी. शर्मा ने सधे हुए एवं प्रभावी अंदाज में किया
जिससे पूरे आयोजन में गरिमा बनी रही। कार्यक्रम में सरल विशारद, डॉ. उमाकांत गुप्त, कमल रंगा, राजेंद्र जोशी, चंचला पाठक, मोनिका गौड़, दीपचंद सांखला, रामसहाय हर्ष, डॉ. गौरी शंकर प्रजापत, आनंद मस्ताना, डॉ. नमामी शंकर आचार्य, अजय जोशी, राजाराम स्वर्णकार, बुनियाद जहीन, अविनाश व्यास, रामकुमार व्यास, तुषार आचार्य, रवि शुक्ल, इरशाद अजीज़, निखिल हर्ष, शुभम व्यास, विवेक व्यास सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।




